तीन साल से कागजों में अटकी 28 करोड़ की पेयजल योजना, नतीजा-जल संकट

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चंबल के किनारे रोशनी का शहर प्यासा है। कारण शहर की 28 करोड़ की पेयजल योजना अटकी हुई है। राजस्थान परमाणु बिजलीघर के सामाजिक सरोकार के तहत प्रस्तावित पेयजल योजना की डीपीआर भी बन गई। सरकार, कलेक्टर ने भी एनओसी जारी कर दी, लेकिन पिछले 3 सालों से यह कागजों में ही अटकी हुई है।
रावतभाटा शहर को साफ और स्वच्छ पानी पिलाने के लिए यह योजना बनाई गई थी। जानकारी के अनुसार एक मामूली विवाद से इस योजना को रोक दिया गया और समय दौड़ता गया और 3 साल से यह योजना अटकी हुई है। इस पेयजल योजना के मंजूर और काम शुरू नहीं होने से रावतभाटा में पेयजल किल्लत बनी हुई है। यह स्थिति और विचित्र हो गई है कि राज्य सरकार और जलदाय विभाग ने इसकी एनओसी जारी कर कर दी। अब रावतभाटा के लिए राज्य सरकार की तरफ से भी कोई नहीं पेयजल योजना मंजूर नहीं हो सकती। ऐसे में रावतभाटा के लिए यह दुविधापूर्ण स्थिति हो गई है। पेयजल योजना की एनओसी जारी करने के बाद भी पेयजल योजना का काम शुरू नहीं हो पा रहा।
15 लाख रुपए लगे डीपीआर बनने में
शहर की पेयजल योजना बनाने के लिए 15 लाख डीपीआर पर खर्च किए गए। इस 15 लाख रुपए खर्च करने के बावजूद पेयजल योजना मंजूर नहीं हो सकी। नगर पालिका ने यह राशि अपने निजी फंड से खर्च की है। इसके लिए प्लान बनाया लेकिन प्लान मंजूर नहीं हुआ और अभी योजना अटकी हुई है।
क्या है विवाद
राजस्थान परमाणु बिजलीघर के अधिकारी नाम ना छापने की शर्त पर बताते हैं कि राजस्थान परमाणु बिजलीघर इस पेयजल योजना की राशि खर्च करने के लिए तैयार है, लेकिन जब यह योजना बनी तो कुछ लोगों ने यह विरोध किया कि पानी राणा प्रताप सागर बांध के इंडिया गेट से नहीं बल्कि दूसरे स्थान से दिया जाना चाहिए। अधिकारी बताते हैं कि इंडिया गेट पर सिर्फ फिल्टर प्लांट बनना था और शहर में पाइपलाइन बिछाई जाती। लोगों की बात समझ में नहीं आई और विभाग में अपने हाथ विवाद के कारण रोक लिया।

विधायक कर सकते हैं समस्या का समाधान
रावतभाटा विधायक राजेंद्र सिंह बिधूड़ी ही इस मामले का समाधान कर सकते हैं। परमाणु बिजलीघर के अधिकारी बताते हैं कि विभाग अभी भी इस योजना को मंजूर करने के लिए तैयार है। विधायक के कहने पर विभाग इस योजना को मंजूर कर देगा। पानी के स्थान को लेकर जो विवाद है, उसका बाद में भी समाधान हो सकता है। पहले फिल्टर प्लांट बन जाए और शहर की पाइप लाइन बिछाने का काम हो जाए तो पानी की किल्लत दूर हो जाएगी।

अब यदि लोगों की यह धारणा है कि पानी बरखेड़ा से आगे से लाना है तो वह दूसरी योजना में लाया जा सकता है। पहले फिल्टर प्लांट बन जाए और पाइपलाइन बिछाने का काम हो जाए जाए। इसमें भी कम से कम 2 से 3 साल का वक्त लग जाएगा। उसके बाद जहां से पानी लाना चाहे वहां से ला सकते हैं।
अधिकारियों की जल्द बुलाएंगे बैठक
पूर्व पालिका अध्यक्ष धर्मेंद्र तिल्लानी कहते हैं कि विधायक शहर में शुद्ध पेयजल के लिए लगातार प्रयासरत हैं। परमाणु बिजलीघर के अधिकारियों की जल्दी ही इसकी बैठक बुलाकर रावतभाटा की पेयजल योजना को मंजूरी दिलाएंगे। इससे शहर की पेयजल किल्लत दूर हो जाएगी और रावतभाटा को साफ और स्वच्छ जल मिलेगा।



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^रावतभाटा में फिलहाल 45 लाख लीटर पानी की मांग है, जबकि 38 लाख लीटर ही अधिकतम फिल्टर हो पाता है। ऐसे में 7 लाख लीटर पानी की किल्लत है। जैसे-जैसे आबादी बढ़ती जा रही है। -सत्यवान तिवारी, अभियंता जलदाय विभाग


source https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/kota/rawatbhata/news/28-crore-drinking-water-scheme-stuck-in-paper-for-three-years-result-water-crisis-127372743.html

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