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रेलवे कर्मचारियों को बांटे मास्क, सेनेटाइजर

बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल की ओर से गुरुवार को बीकानेर रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर, टीटीई स्टॉफ सहित कर्मचारियों को मास्क व सेनेटाइजर बांटे। मंडल अध्यक्ष रघुराजसिंह राठौड़, सचिव वेदप्रकाश अग्रवाल, प्रवक्ता सोनूराज आसूदानी ने स्टेशन मास्टक राजकुमार अग्रवाल को रेलवे कर्मचारियों के लिए मास्क व सैनेटाइजर उपलब्ध करवाए। इस अवसर पर सतीश पुरोहित, गोविंद कच्छावा, सचिन भाटिया, महावीर कुमार प्रजापत आदि शामिल थे। राठौड़ ने मास्क पहनने का आह्वान भी किया।

Wash your hands with sanitizers



courtesy:bahskar
काेराेना वायरस, बदलता मौसम कह रहे हैं- संभल जाओ वर्ना हालात हाेंगे विकट


कोरोना वायरस और देशभर में मौसम का बदलता मिजाज हमें संकेत दे रहे हैं कि संभल जाओ, वर्ना हालात अत्यंत विकट हाेंगे।ये घटनाएं हमें पर्यावरण के प्रति सजग होने का संदेश दे रही हैं। पर्यावरण से गैर जरूरी छेड़छाड़ की आदत नहीं बदली तो प्रकृति कितना रौद्र रूप दिखाएगी इसकी कल्पना करना भी मुश्किल हाेगा।


शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस है। शहर में विभिन्न संगठनों की ओर से पर्यावरण संरक्षण को लेकर कार्यक्रम किए जा रहे हैं। राजकीय पटेल उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राध्यापक गुरुशरण गोयल ने बताया कि धरती पर पिछले कुछ सालों में भूकंप, बाढ़, सुनामी जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ीं हैं। प्रकृति की इन आपदाओं में जान-माल का खूब नुकसान होता है। धरती के ईको-सिस्टम में आए बदलावों और तेजी से बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही यह सब हो रहा है।
वैज्ञानिकों ने इन आपदाओं के लिए हमारे प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। यही हाल रहा तो 2030 तक हमें रहने के लिए दूसरे ग्रह की जरूरत होगी।
विलायती बबूल को हटाने की चल रही मांग
उपखंड के वन्य क्षेत्र से विलायती बबूल को हटाए जाने की मांग लंबे समय से चल रही है। गोयल ने बताया की ब्यावर के आसपास स्थित पहाड़ियों में हाेने वाला खनन पर्यावरण व वन्य जीवों के लिए खतरा है। अरावली की पहाड़ियों में फैले वन्य क्षेत्र को विलायती बबूल धीरे-धीरे खत्म कर रहा है। यह पहाड़ियों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी फैल चुका है। अरावली पर पाई जाने वाली अमूल्य वन व वानस्पतिक संपदा को बबूल निगलता जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सही समय पर अगर लगातार विलायती बबूल को रोका नहीं गया तो भविष्य में पेड़-पौधों की रही सही प्रजातियां भी खत्म हो जाएंगी। पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली कुछ संस्थाओं की ओर से किए सर्वे के मुताबिक विलायती बबूल देशी जानवरों और पौधों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिसके चलते जैव विविधता कम हो गई। वन विभाग ने अब प्रयास तेज किए हैं। बबूल के स्थान पर कम पानी में उगने वाले बिल्व पत्र, लसोड़ा, खेजड़ी, कुमटा, गूंदी, इमली, जामुन, बांस, एलोवेरा जैसे फलदार पौधे लगाए जाएंगे।



ब्यावर .लॉकडॉउन की वजह से आमजन के घरों मे रहने की वजह से शहर का सुभाष उद्यान दिख रहा हरा भरा।


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गुहाला में कोरोना पॉजिटिव पड़ोसियों के घर व बाजार जाती रही


गुहाला में एक महिला कोरोना पाॅजिटिव आने के बाद चिकित्सा टीम मौके पर पहुंची। गांव के बिसायती मोहल्ले की महिला जयपुर के रामगंज में अपने रिश्तेदार के घर से 10 दिन पहले ही गुहाला आई थी। बुखार व खांसी होने पर उसका सैंपल भेजा गया। ग्रामीणों ने बताया महिला 10 दिन तक पड़ोसियों के घर पर भी कई बार गई। बाजार में खरीदारी के लिए भी घूमती रही। चिकित्सा विभाग ने मोहल्ले को सेनेटाइज कराया। मौके पर तहसीलदार ब्रजेश गुप्ता व पुलिस अधिकारी आए।




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अधिकारी कोरोना पॉजिटिव आए, हिम्मत नहीं हारी, वर्चुअल हुआ वार रूम



कोविड मरीजों की ट्रेकिंग से लेकर राशन वितरण जैसे 11 अहम कामों की मॉनिटरिंग सरकार के कोरोना वार रूम में 29 मई को एक अधिकारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। लेकिन इसके बाद भी वार रूम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि काम का तरीका बदल दिया।

अब यह वार रूम वर्चुअल तरीके से काम कर रहा है। आईआईटी बैक ग्राउंड से आए सूचना एवं विभाग के प्रमुख सचिव अभय कुमार ने वार रूम के सिस्टम को वर्चुअल मोड पर शिफ्ट कर दिया। आईटी वर्चुअल वॉररूम में वीडियो कॉल पर लगातार टीम मीटिंग की व्यवस्था की गई है। पहले वॉररूम में 8-8 घंटे की शिफ्ट में अधिकारी एवं कर्मचारी काम कर रहे थे। अब भी काम इन्हीं शिफ्टों में हो रहा है, लेकिन सभी कर्मचारी होम क्वारेंटाइन रहते हुए काम कर रहे है।

कार्य तीन स्तर पर विभाजित
आयुक्त, सूचना एवं प्रौद्योगिकी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि आईटी वर्चुअल वॉररूम के तहत कार्य विभाजन की तीन स्तरीय संरचना की गई है जिसमें पहला प्रबंधन है इसमें इनबिल्ट डैशबोर्ड और सिस्टम के माध्यम से ऑनलाइन वॉररूम के कामकाज की निगरानी के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। आरएएस एवं आरपीएस अधिकारियों को जिला स्तर पर मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। ये लोग फोन कॉल, व्हॉट्सएप के माध्यम से जिला वॉररूम के समूहों से कनेक्ट रहते हैं। वहीं तीसरी व्यवस्था में कर्मचारियों को जिसमें घर, वॉररूम से काम करने की जिम्मेदारी दी गई है।



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मंत्री विश्वेंद्र के गनमैन व आरटीडीसी स्टाफ को बताया पॉजिटिव



भरतपुर में डाटा फीडिंग कर रहे मेडिकल स्टाफ की गड़बड़ी से मंगलवार को जिला प्रशासन में हड़बड़ी फैल गई। दरअसल, मेडिकल स्टाफ ने डाटा फीडिंग करते समय पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के गनमैन और आरटीडीसी स्टाफ समेत 6 लोगों को कोरोना पॉजिटिव अंकित कर दिया। जबकि वे जयपुर एसएमएस की मूल रिपोर्ट में नेगेटिव थे।


इस पर पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए गहन जांच करवाई तो यह गड़बड़ी उजागर हुई। उनका कहना था कि इससे जिले में अनावश्यक भय फैलता है। बाद में उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्रिंसिपल के.के. शर्मा ने माना कि डाटा फीडिंग में गड़बड़ी हुई है। कलेक्टर नथमल डिडेल ने बताया कि ऑपरेटर की गलती से एक्सल शीट पर नेगेटिव की बजाए पॉजिटिव प्रिंट हो गया था, जिसे तुरंत सही कर लिया गया। ऐसे 6 मामले थे। दोषी ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।




अब एक-दूसरे से ही फैल रहा कोरोना, 42 नए रोगी मिले, शहर में फिर लगाया कर्फ्यू


आखिरकार हमारी लापरवाही हमें ही भारी पड़ी। क्योंकि मास्क, सेनेटाइजर और डिस्टेंसिंग का हमने ध्यान नहीं रखा। प्रशासन का फोकस भी इस तरफ कम और रोगियों को जल्दी ठीक करने पर ज्यादा रहा। इसलिए अब एक-दूसरे से ही संक्रमण फैल रहा है। शहर में अब तक 127 संक्रमित मिल चुके हैं। मंगलवार को भी जिले में 42 नए रोगी मिले जबकि 20 अन्य संक्रमितों की दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। इन्हें मिलाकर जिले में संक्रमितों की संख्या 361 तक पहुंच गई है। पिछले 21 दिन में 250 रोगी सामने आ चुके हैं। लगातार 8 वां दिन है जब जिले में बड़ी संख्या में पॉजिटिव रोगी मिले हैं। सीकरी थाने में तो लूट का आरोपी कोरोना पॉजिटिव निकला है। इसके बाद थाने के पूरे स्टाफ को ही क्वारेंटाइन करना पड़ा है।
इधर, भरतपुर में कम्युनिटी स्प्रैड की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने फिर से सब कुछ लॉक कर दिया है। नगर निगम सीमा को जीरो मोबिलिटी एरिया घोषित करते हुए फिर से पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस बार पहले से ज्यादा सख्ती है। बैंक, किराना, फल-सब्जी और शराब तक की दुकानें बंद कर दी गई हैं। अति आवश्यक मेडिकल स्टोर, पेट्रोल पंप, एलपीजी गैस, अस्पताल को ही छूट रहेगी। दूध की दुकानें भी सुबह 6 से 8 और शाम को 5 से 7 बजे तक खुलेंगी।

27 मई को गिरफ्तार किया था लूट का आरोपी
सीकरी पुलिस ने 27 मई को रायपुर सुकेती निवासी युवक को 5 लाख रुपए की लूट के मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे पुलिस 3 जून तक पुलिस रिमांड पर लिया गया। इस बीच इसका कोरोना टेस्ट कराया गया जो मंगलवार को पॉजिटिव आया। इसके बाद सीकरी थाने के पूरे स्टाफ को क्वारेंटाइन कर दिया गया है। थाने में एसएचओ सहित सभी पुलिस कर्मियों के सैंपल लिए जा चुके हैं। लेकिन, अभी उनकी रिपोर्ट नही आई है।



बयाना के 11 वर्षीय बालक का 13वां सैंपल नेगेटिव, अस्पताल से छुट्टी



बयाना के कसाईपाड़ा का 11 वर्षीय बालक संभवतः देश का पहला ऐसा कोरोना संक्रमित रोगी होगा जो सर्वाधिक 49 दिन तक अस्पतालों में भर्ती रहा। क्योंकि प्रदेश में कोई भी कोरोना संक्रमित रोगी बालक 18 दिन से ज्यादा भर्ती नहीं रहा। अब 13 और 14वां सैंपल नेगेटिव आने के बाद उसे जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल से सोमवार को छुट्टी दे दी गई है। छुट्टी मिलने के बाद यह बालक काफी खुश हुआ और वार्ड में ही नाचने लगा। परिजनों ने भी बिना देर किए उसे तुरंत घर भिजवा दिया। यह बालक 14 अप्रैल को परिजनों के साथ बयाना में क्वारेंटाइन किया गया था। इसका पहला सैंपल 16 अप्रैल को पॉजिटिव आया था। उसी दिन उसे भरतपुर के आरबीएम अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। यहां नेगेटिव नहीं होने पर उसे जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (एसएमएस) में रैफर किया गया था। एसएमएस में भी वह 21 दिन के भर्ती रहने और गहन इलाज के बाद नेगेटिव हुआ।



अस्पताल में बिल्कुल मन नहीं लगा, क्योंकि पापा के पास एंड्रायड फोन नहीं था : कासिम

छुट्टी मिलने के बाद प्रसन्न हुए इस संक्रमित बालक कासिम ने बताया कि मुझे न तो खांसी, जुकाम, बुखार आदि कोई बीमारी थी और न ही मुझे कोई परेशानी महसूस हो रही थी। बल्कि ऐसा लगा कि पता नहीं मुझे जबरदस्ती अस्पताल में रखा जा रहा है। भरतपुर और और जयपुर के अस्पतालों में मेरा बिलकुल भी मन नहीं लगा। क्योंकि मेरे पास पापा के अलावा अन्य कोई परिजन या खेलने के लिए साथी बालक नहीं था। पापा के पास एंड्रायड मोबाइल फोन भी नहीं था, जिससे मैं खेल सकूं। मेरे साथ वार्ड में जो अन्य संक्रमित बालक आए थे, उन सब की जल्दी छुट्टी हो चुकी थी। वे अपने परिजनों के साथ घर जा चुके थे। इसलिए जब मुझे पता चला कि मेरी अस्पताल से छुट्टी हो रही तो मुझे बहुत खुशी हुई। मैं तुरंत घर चला आया।