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पॉलिटिकल रिपोर्टर. जोधपुर| गर्मियों का मौसम आते ही सब जगह पानी का संकट विकराल रूप ले लेता है। राजस्थान में भी पानी का संकट है। इसे लेकर हमेशा की तरह राजनीति जोरों पर हैं। जोधपुर में रविवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत और प्रदेश के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी आमने सामने हो गए। दोनों ने रविवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरोप लगाए।
भाजपा: विफलता का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की बजाय गहलोत सरकार गंभीर हो
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने राजस्थान सरकार से पूछा कि गरीबों के घर में पानी पहुंचे और माताओं-बहनों को मटका उठाकर चलने से मुक्ति मिले, क्या ये राज्य सरकार की प्राथमिकता है या नहीं? उन्होंने नसीहत दी कि अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की बजाय राज्य सरकार जल जीवन मिशन पर गंभीरता के साथ काम करे।
उन्होंने कहा कि पहले राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में पूरे देश का बजट 5 हजार करोड़ होता था, लेकिन मोदी सरकार साढ़े तीन लाख करोड़ का बजट लेकर देश के हर घर तक पीने का पानी पहुंचा रही है। राज्य सरकारों ने बढ़े हुए पैसों को रेवड़ियों की तरह बांट दिया। आर्थिक प्रबंधन नहीं करने के कारण से ये परिस्थिति पैदा हुई। अब वो केंद्र को सामने रखकर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वे राज्य के जलदाय मंत्री बीडी कल्ला और मुख्यमंत्री (जो वित्त मंत्री भी हैं) से कहूंगा कि वो ये स्पष्ट करें कि केंद्रीय कर राजस्व में राज्यों की 32 से 42 प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ने से जो पैसा आया, उसे वो क्यों नहीं प्राथमिकता तय करके जल जीवन मिशन में लगाते हैं।
उन्होंने कहा कि या तो वो सुनिश्चित करें कि पानी की हमारी प्राथमिकता नहीं है, जो राज्य सरकार का काम है। हम उसको पूरा करने केलिए 50 प्रतिशत पैसा दे रहे हैं, फिर भी वो अपनी मजबूरी दिखा रहे हैं। केंद्र से मिले पैसों में से केवल 21 प्रतिशत ही खर्च कर पाए और अब मुख्यमंत्री और जलदाय मंत्री पत्र लिख कर राजस्थान की ग्रांट को 90 प्रतिशत करने की बात कर भ्रम फैला रहे हैं।
शेखावत ने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के मित्र मेरे ऊपर कटाक्ष कर रहे थे कि सांसद नहीं आए। मैं एक बार उनसे पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस का उम्मीदवार कहां है? सरदारपुरा का विधायक कहां है?
कांग्रेस : जनता जल योजना में 10 फीसदी जन भागीदारी का नियम वापस करवाएं शेखावत
प्रदेश के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने रविवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के मंत्रालय पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जनता जल योजना में जनता की 10 फीसदी भागीदारी के कारण रेगिस्तानी जिलों में लोगों को दिक्कत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी शेखावत से मंत्री व सांसद के होने के नाते अपील है कि वे इस नियम में संशोधन करवाकर लोगों को राहत दिलाएं।
सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी इलाकों के लोगों के लिए 10 फीसदी जन भागीदारी का प्रावधान किया गया हैं। ये हमारे लिए छूट की बजाय मुसीबत बन गया हैं। जहां एक ओर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत दी गई, लेकिन रेगिस्तान में रहने वालों को राहत की बजाय दस फीसदी जन भागीदारी का नियम थोपा गया हैं।
जैसे किसी भी ढाणी के आगे से पाइप लाइन निकले और उसे कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। ये नियम गलत हैं। राजीव गांधी लिफ्ट नहर के तीसरे फेज के लिए योजना बनाई गई है, इसमें सिर्फ शहर को ही पानी देने का प्रावधान किया गया है। इस बारे में चौधरी ने कहा कि स्कीम का शेयर केंद्र से कितना मिलेगा? क्या केंद्र पहले की तरह शेयर 90 फीसदी हिस्सा देगी।
स्कीम के नियम किस आधार पर बनाए गए हैं। इस बारे में बात करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मैंने लगातार शेखावत व उनके मंत्रालय को चिट्ठी भेजी। तमाम योजनाओं काे रोक दिया गया। राजस्थान के किसानों के सीएडी के माध्यम से कार्य सौ फीसदी रोके गए हैं। टिड्डी के बारे में चौधरी ने कहा कि डब्ल्यूएचओ और विश्व खाद्य संगठन की चेतावनी दी उसे केंद्र ने नजरअंदाज किया। उसे गंभीरता से नहीं लिया।
बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल की ओर से गुरुवार को बीकानेर रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर, टीटीई स्टॉफ सहित कर्मचारियों को मास्क व सेनेटाइजर बांटे। मंडल अध्यक्ष रघुराजसिंह राठौड़, सचिव वेदप्रकाश अग्रवाल, प्रवक्ता सोनूराज आसूदानी ने स्टेशन मास्टक राजकुमार अग्रवाल को रेलवे कर्मचारियों के लिए मास्क व सैनेटाइजर उपलब्ध करवाए। इस अवसर पर सतीश पुरोहित, गोविंद कच्छावा, सचिन भाटिया, महावीर कुमार प्रजापत आदि शामिल थे। राठौड़ ने मास्क पहनने का आह्वान भी किया।
चूरू जिले में राजगढ़ के सीआई विष्णुदत्त बिश्नोई के सुसाइड मामले की जांच सीबीआई से कराने के प्रस्ताव काे सीएम अशाेक गहलाेत ने गुरुवार काे औपचारिक मंजूरी दे दी। प्रदेश का गृह विभाग अब सेंट्रल डीओपीटी को पत्र भेजकर सीबीआई जांच का आग्रह करेगा। वहां से मंजूरी के बाद ही सीबीआई जांच होगी। बता दें कि सोमवार काे बिश्नोई समाज के प्रतिनिधि मंडल ने सीएम से मिलकर मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। मंगलवार को बिश्नोई महासभा के संरक्षक कुलदीप बिश्नोई ने सरकार को चेतावनी दी थी कि शाम 5 बजे तक सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए गए तो समाज आंदोलन को मजबूर होगा। सरकार ने बिश्नाेई के परिजनाें काे न्यायिक जांच व सीबी-सीआईडी से जांच कराने का विकल्प दिया था, लेकिन बिश्नोई महासभा व थानाधिकारी के परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग रखी।।
राजगढ़ थाना प्रभारी विष्णु दत्त विश्नोई ने 23 मई को अपने सरकारी क्वार्टर में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इसके बाद उनके दो सुसाइड नोट सामने आए है। इनमें एक नोट उन्होंने अपने जिले की एसपी तेजस्विनी गौतम के नाम लिखा। इसमें उन्होंने लिखा- आदरणीय मैडम, माफ करना, प्लीज, मेरे चारों तरफ इतना प्रेशर बना दिया गया कि मैं तनाव नहीं झेल पाया। मैंने अंतिम सांस तक मेरा सर्वोत्तम देने का राजस्थान पुलिस को प्रयास किया। निवेदन है कि किसी को परेशान नहीं किया जाए। मैं बुझदिल नहीं था। बस तनाव नहीं झेल पाया। मेरा गुनाहगार मैं स्वयं हूं।
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय बीकानेर की अकादमिक काउंसिल की बैठक गुरुवार को ऑनलाइन वेबेक्स एप्लीकेशन के जरिए कुलपति प्रो.एचडी चारण की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बीटीयू की तीसरी अकादमी काउंसिल की इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों के कौशल उन्नयन के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कई कोर्सेज को चालू करने व नए सिलेबस निर्माण पर सहमति बनी।
जिसके तहत पीजी स्तर पर कृषि व्यवसाय प्रबंधन में पीजी डिग्री, डाटा साइंस में एमटेक, मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमटेक आदि नई को शुरू किए जाएंगे। वही एमटेक (डाटा साइंस) व (एमटेक) मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग विषय की नई निर्मित स्कीम व सिलेबस सर्व सहमति से पारित किए गए।
एमसीए के पहले व दूसरे सेमेस्टर स्कीम व सिलेबस सहित एमबीए (एचआर, फाइनेंस, मार्केटिंग, उद्यमिता, डाटा साइंस, एग्री बिजनस इत्यादि स्पेशलाइजेशन) के तीसरे व चौथे सेमस्टर व बीटेक (आर्टिफीसियल इंटेलीजेन्स), बीटेक (डाटा साइंस), बीटेक (मशीन लर्निंग एंड कंप्यूटिंग) कोर्स के तीसरे व चौथे सेमेस्टर की स्कीम व सिलेबस सर्व सहमति से पारित हुए।
बैठक में बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के निदेशक दरिया सिंह यादव, बीटीयु के रजिस्ट्रार अजीत सिंह राजावत, एमबीएम जोधपुर से सुनील परिहार, अकादमिक निदेशक डॉ. यदुनाथ सिंह, डॉ. धर्मेन्द्र यादव, ईसीबी प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश भामू, परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुकेश जोशी आदि शामिल हुए।
-प्रो. एचडी चारण, कुलपति, बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय
स्थानांतरण नीति सर्व सहमति से पारित :
राजस्थान के अंतर्गत व राजस्थान से बाहर तकनीकी कोर्स में किसी भी यूनिवर्सिटी व महाविद्यालय का विद्यार्थी अपना स्थानांतरण किसी भी महाविद्यालय में करवा सकेगा। ये नियम एक ही शहर में दो महाविद्यालयों या यूनिवर्सिटी पर लागु नहीं होगा। एक शहर से दूसरे शहर में ही लागू होगा।
भले ही 2 दिन से टिड्डी कम दिखाई दे रही हो लेकिन पूरी तरह से अभी भी खत्म नहीं हुई है। बुधवार को करीब 50 हेक्टेयर में टिड्डी मारने के बाद गुरुवार को बॉर्डर के सटे बीकमपुर इलाके के 1 किलोमीटर दायरे में टिड्डियो ने अपना जाल बिछाया। गुरुवार को कृषि विभाग की टीम पूरे दलबल के साथ बीकमपुर पहुंची।
किसानों के ट्रैक्टर और विभाग की गाड़ियों के साथ करीब 4 घंटे तक टिड्डी मारने में जुटी रही। हालांकि अभी भी जोधपुर और जैसलमेर में टिड्डी होने के कारण बीकानेर में किसी भी वक्त इनका नया दल आ सकता है इसलिए कृषि विभाग की टीम सतर्क है और अपना नेटवर्क फैला दिया ताकि टिड्डी आने की सूचना कृषि विभाग तक पहुंच सके और समय रहते उनको मारा जा सके ताकि फसलों को नुकसान ना हो।
कृषि विभाग के सहायक निदेशक रामकिशोर मेहरा का कहना है कि टिड्डी मारने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। संयुक्त निदेशक डॉ उदय भान ने कहा कि पाकिस्तान से आने वाले इनपुट के हिसाब से भी विभाग तैयार है।

सिंचित क्षेत्र विकास में 67 कनिष्ठ सहायक की काउंसलिंग 18-19 जून को होगी। काउंसलिंग के लिए पति पत्नी होने पर विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र, पति पत्नी में से यदि कोई पूर्व में राजकीय सेवारत में है तो उसका प्रमाण पत्र या पे स्लिप, शहीद परिवार का है तो उसका प्रमाण, चयनित अभ्यर्थियों में किसी के माता-पिता असाध्य रोग से पीड़ित हैं तो उसका प्रमाण सहित सभी जरूरी दस्तावेज लाना अनिवार्य होगा।
काउंसलिंग सिंचित क्षेत्र विकास कार्यालय में होगी। काउंसलिंग कमेटी के अध्यक्ष अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि 2 दिन होने वाली काउंसलिंग में अभ्यर्थियों को जिले आवंटित किए जाएंगे सरकार ने तय किया है कि विकलांग विधवा परित्यक्ता को स्थान चुनने में प्राथमिकता दी जाएगी सेस काउंसलिंग नियमानुसार होगी।
प्रदेश की किसानों ने अपने खेतों व फसल की सिंचाई के लिए कृषि बिजली कनेक्शन के डिमांड नोटिस की राशि जमा करवा दी। इसके बावजूद सरकारी बिजली वितरण कंपनियां कृषि कनेक्शन नहीं कर रही है। जयपुर, जोधपुर व अजमेर डिस्कॉम में 20 हजार से ज्यादा कृषि बिजली कनेक्शन की फाइलें सहायक अभियंता दफ्तरों में पड़ी हुई है।
डिस्कॉम के इंजीनियर काम करने के लिए कॉन्ट्रेक्टर व स्टोर में ट्रांसफार्मर, केबल, कंडक्टर सहित अन्य मेटेरियल नहीं होने का बहाना कर किसानों को कनेक्शन नहीं दे रहे है। ऐसे में प्रदेश में मूंगफली, मक्का, ज्वार-ग्वार और सब्जियों की बुआई प्रभावित हो रही है।
स्टोर में मेटेरियल नहीं होने के कारण कृषि बिजली कनेक्शन नहीं हुए। ऐसे में कनेक्शन की प्राथमिकता में छह महीने की देरी होने की संभावना जताई जा रही है। ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि कोरोना संक्रमण व लॉकडाउन के कारण कनेक्शन करने में दिक्कत थी। लॉकडाउन से राहत के साथ ही अब किसानों को प्राथमिकता से कृषि कनेक्शन दिए जाएंगे। सरकार एक लाख से ज्यादा कृषि कनेक्शन कर चुकी है।
फरवरी 2012 के बाद आवेदन वाले 3.12 लाख कनेक्शन पेंडिंग : सामान्य श्रेणी में कृषि कनेक्शन के लिए फरवरी 2012 से दिसंबर 2019 तक के 3.12 लाख आवेदन बकाया है। एससी-एसटी के आवेदनों को तुरंत डिमांड नोटिस जारी किया जा रहा है। वहीं ड्रिप योजना हर साल 50 हजार खर्च हो रहा है।
प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलाें में सोशल मीडिया इंटरफेस फाॅर लर्निंग एंगेजमेंट “स्माइल’ के बाद आकाशवाणी के जरिए शिक्षावाणी पहुंचाना भी शुरू कर दिया है। ऑनलाइन क्लासेज शुरू हुए भी 2 महीने से ज्यादा हो गया है। जबकि हाल यह है कि इसकी लचर माॅनिटरिंग के कारण अभी भी करीब 3 लाख से ज्यादा विद्यार्थी समान शिक्षा से वंचित है।
हाल ही में डिस्ट्रिक्ट स्कोरकार्ड की रैंकिंग सहित अन्य आंकड़े जारी किए हैं। स्कोरकार्ड में जयपुर पहले तथा उदयपुर दूसरे पर है। इस रिपाेर्ट के अनुसार उदयपुर जिले का भले ही दूसरा स्थान हो, लेकिन शिक्षकों की भागीदारी के मामले में जयपुर और उदयपुर का फासला काफी है। जहां जयपुर में शिक्षकों की भागीदारी 59 फीसदी से ज्यादा है, वहीं उदयपुर में महज 11 फीसदी शिक्षक ही छात्रों से नियमित सम्पर्क रहे हैं। अभी स्कूल खुलने को लेकर संशय की स्थिति है, ऐसे में ऑनलाइन एजुकेशन में लचर माॅनिटरिंग भी बड़ा सवाल है।
शिक्षक नहीं कर रहे बच्चों से सम्पर्क, सही तरीके से नहीं हाे रही माॅनिटरिंग
डिस्ट्रिक्ट स्कोरकार्ड की रैंकिंग के अनुसार कुल 4 लाख से भी ज्यादा विद्यार्थियों में अभी तक सिर्फ 71 हजार 723 विद्यार्थी ही अाॅनलाइन एजुकेशन से जुड़ पाए हैं, जबकि 3 लाख से भी ज्यादा विद्यार्थियों तक ऑनलाइन एजुकेशन की पहुंच नहीं है। विभाग की ओर से शिक्षकों को नियमित तौर पर छात्रों से सम्पर्क की बात कही गई थी। इस रिपाेर्ट के अनुसार उदयपुर जिले के 11.25 फीसदी शिक्षकों ने ही ऑनलाइन एजुकेशन कर फीडबैक विभाग को दिए है। 14 हजार 215 शिक्षकों में से सिर्फ 6701 शिक्षक ही नियमित तौर पर छात्रों से सम्पर्क कर रहे हैं।
शिक्षकों के लिए वाॅट्सएप ग्रुप बने हुए हैं। उन्हें छात्रों से लगातार सम्पर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। पीईईओ को इसके लिए पंचायत स्तर पर मॉनिटरिंग करनी होगी।- मुरलीधर चौबीसा, प्रभारी, स्माइल प्रोग्राम
भरतपुर में डाटा फीडिंग कर रहे मेडिकल स्टाफ की गड़बड़ी से मंगलवार को जिला प्रशासन में हड़बड़ी फैल गई। दरअसल, मेडिकल स्टाफ ने डाटा फीडिंग करते समय पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के गनमैन और आरटीडीसी स्टाफ समेत 6 लोगों को कोरोना पॉजिटिव अंकित कर दिया। जबकि वे जयपुर एसएमएस की मूल रिपोर्ट में नेगेटिव थे।
इस पर पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए गहन जांच करवाई तो यह गड़बड़ी उजागर हुई। उनका कहना था कि इससे जिले में अनावश्यक भय फैलता है। बाद में उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्रिंसिपल के.के. शर्मा ने माना कि डाटा फीडिंग में गड़बड़ी हुई है। कलेक्टर नथमल डिडेल ने बताया कि ऑपरेटर की गलती से एक्सल शीट पर नेगेटिव की बजाए पॉजिटिव प्रिंट हो गया था, जिसे तुरंत सही कर लिया गया। ऐसे 6 मामले थे। दोषी ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
आखिरकार हमारी लापरवाही हमें ही भारी पड़ी। क्योंकि मास्क, सेनेटाइजर और डिस्टेंसिंग का हमने ध्यान नहीं रखा। प्रशासन का फोकस भी इस तरफ कम और रोगियों को जल्दी ठीक करने पर ज्यादा रहा। इसलिए अब एक-दूसरे से ही संक्रमण फैल रहा है। शहर में अब तक 127 संक्रमित मिल चुके हैं। मंगलवार को भी जिले में 42 नए रोगी मिले जबकि 20 अन्य संक्रमितों की दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। इन्हें मिलाकर जिले में संक्रमितों की संख्या 361 तक पहुंच गई है। पिछले 21 दिन में 250 रोगी सामने आ चुके हैं। लगातार 8 वां दिन है जब जिले में बड़ी संख्या में पॉजिटिव रोगी मिले हैं। सीकरी थाने में तो लूट का आरोपी कोरोना पॉजिटिव निकला है। इसके बाद थाने के पूरे स्टाफ को ही क्वारेंटाइन करना पड़ा है।
इधर, भरतपुर में कम्युनिटी स्प्रैड की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने फिर से सब कुछ लॉक कर दिया है। नगर निगम सीमा को जीरो मोबिलिटी एरिया घोषित करते हुए फिर से पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस बार पहले से ज्यादा सख्ती है। बैंक, किराना, फल-सब्जी और शराब तक की दुकानें बंद कर दी गई हैं। अति आवश्यक मेडिकल स्टोर, पेट्रोल पंप, एलपीजी गैस, अस्पताल को ही छूट रहेगी। दूध की दुकानें भी सुबह 6 से 8 और शाम को 5 से 7 बजे तक खुलेंगी।
27 मई को गिरफ्तार किया था लूट का आरोपी
सीकरी पुलिस ने 27 मई को रायपुर सुकेती निवासी युवक को 5 लाख रुपए की लूट के मामले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे पुलिस 3 जून तक पुलिस रिमांड पर लिया गया। इस बीच इसका कोरोना टेस्ट कराया गया जो मंगलवार को पॉजिटिव आया। इसके बाद सीकरी थाने के पूरे स्टाफ को क्वारेंटाइन कर दिया गया है। थाने में एसएचओ सहित सभी पुलिस कर्मियों के सैंपल लिए जा चुके हैं। लेकिन, अभी उनकी रिपोर्ट नही आई है।
अस्पताल में बिल्कुल मन नहीं लगा, क्योंकि पापा के पास एंड्रायड फोन नहीं था : कासिम
छुट्टी मिलने के बाद प्रसन्न हुए इस संक्रमित बालक कासिम ने बताया कि मुझे न तो खांसी, जुकाम, बुखार आदि कोई बीमारी थी और न ही मुझे कोई परेशानी महसूस हो रही थी। बल्कि ऐसा लगा कि पता नहीं मुझे जबरदस्ती अस्पताल में रखा जा रहा है। भरतपुर और और जयपुर के अस्पतालों में मेरा बिलकुल भी मन नहीं लगा। क्योंकि मेरे पास पापा के अलावा अन्य कोई परिजन या खेलने के लिए साथी बालक नहीं था। पापा के पास एंड्रायड मोबाइल फोन भी नहीं था, जिससे मैं खेल सकूं। मेरे साथ वार्ड में जो अन्य संक्रमित बालक आए थे, उन सब की जल्दी छुट्टी हो चुकी थी। वे अपने परिजनों के साथ घर जा चुके थे। इसलिए जब मुझे पता चला कि मेरी अस्पताल से छुट्टी हो रही तो मुझे बहुत खुशी हुई। मैं तुरंत घर चला आया।
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के छात्रसंघ का कार्यकाल 30 अप्रैल को पूरा हो गया है। ऐसे में 30 मई को विवि के इंजीनियर रवि पुरोहित ने सभी पदाधिकारियों को सोशल मीडिया पर नोटिस भेजकर कार्यालय खाली करने को कहा गया है। दो माह से अधिक समय से लॉकडाउन था, इसलिए नोटिस अब भेजे गए हैं।
पिछले सत्र में कार्यालय आवंटन को लेकर गहमागहमी हुई थी| गौरतलब है कि सत्र 2019-20 में छात्रसंघ कार्यालय आवंटन को लेकर गहमागहमी हुई थी। इस दौरान पुराना फर्नीचर सही हालत में होने के बावजूद छात्र प्रतिनिधियों को लाखों रुपए आवंटित किए गए थे। अपेक्स के 4 सहित कुल 8 छात्र प्रतिनिधियों को कार्यालय का आवंटन किया गया था।
उपखंड अधिकारी उत्सव कौशल ने कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण कर कोविड-19 की रोकथाम तथा नियंत्रण के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की पालना के आदेश दिए। उपखंड अधिकारी उत्सव कौशल गांव बैलारा खुर्द, अवार तथा बावैन पहुंचे जहां उन्होंने गांव का अवलोकन किया और कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र में प्रशासन की ओर से की जाने वाली व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उपखंड अधिकारी ने गांव में पॉजिटिव निकले मरीजों के घर के आसपास घरों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि बैलारा खुर्द में कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण किया। कोरोना वायरस संक्रमण निगरानी समिति के इंचार्ज रमेश चंद शर्मा से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बैलारा खुर्द छोटा गांव होने के कारण पूरे गांव में कर्फ्यू लगाने की आवश्यकता है। उपखंड अधिकारी ने बताया कि कर्फ्यू लगाने के अधिकार जिला कलेक्टर को होते हैं इस संबंध में जिला कलेक्टर से चर्चा कर कार्रवाई की जाएगी क्योंकि मंगलवार को बैलारा खुर्द में दूसरा पॉजिटिव केस और मिला है। इसको देखते हुए पूरे गांव में कर्फ्यू लगाने की आवश्यकता है। वही एसडीएम उत्सव कौशल ने बैलारा कला, अवार, बावैन क्वारेंटाइन सेंटरों तथा तीनों गांव में लगाए गए कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने क्वारेंटाइन सेंटरों पर क्वारेंटाइन किए गए लोगों से मिलकर व्यवस्था का हाल जाना। साथ ही वहां मौजूद लोगों को अनुशासन में रहने का निर्देश दिया। इस मौके पर कोरोना निगरानी समिति के सदस्य दिनेश शर्मा, गिर्राज कोली आदि मौजूद रहे।
कोरोना महामारी की रोकथाम की दृष्टि से जिले में घोषित लॉकडाउन का असर अदालतों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पिछले सवा दो माह से जिले के न्यायालय परिसर के अधिकांश प्रवेश द्वारों और वहां स्थित अधिकांश अदालतों पर ताले लटके हुए हैं। वहीं अधिवक्ताओं और परिवादियों के अदालतों में आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। लॉकडाउन के दौरान इतिहास में पहली बाद अदालतों को रोस्टर प्रणाली से चलाया जा रहा है। न्यायालयों में ई-मेल, व्हाट्सएप के जरिए परिवाद दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं न्यायाधीशों द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए ही सुनवाई की जा रही और अधिवक्ता पैरवी कर रहे हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष माधोसिंह मदेरणा ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सवा दो माह की अवधि में जिले के न्यायालयों में विभिन्न प्रकृति के 870 नए प्रकरण दर्ज हुए हैं। जिनमें 500 प्रकरण जमानत प्रार्थना पत्र, 150 सुपुर्दगी प्रार्थना पत्र तथा 220 अन्य प्रकरण दर्ज हुए हैं।
इधर विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किए गए लीगल एड डिफेंस काउंसलिंग सिस्टम द्वारा लॉक डाउन की अवधि के दौरान 251 लोगों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राजेंद्र चौधरी ने बताया कि कार्य व्यवस्था में लगाए गए अधिवक्ताओं द्वारा लॉक डाउन अवधि के दौरान 137 मामलों में बेल व रिमांड अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। इसी तरह जेलों में निरुद्ध कैदियों की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 के तहत 55 कैदियों के व धारा 439 के तहत 38 कैदियों के जमानत आवेदन भरकर न्यायालयों में पैरवी की है। तथा जेलों में निरुद्ध 25 कैदियों को जमानत का लाभ दिलवाया गया है। इसी प्रकार पोक्सो न्यायालयों में तीन अपील प्रस्तुत की हैं। तीन प्रकरणों में सुपुर्दगी पर वाहन रिलीज करवाए गए हैं। इसी प्रकार किशोर न्याय बोर्ड में 9 इनमेट्स की ओर से जमानत आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं।
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