हम जब भी बीमार हाेते हैं ताे हमारा सबसे पहला साथी हाेता है शरीर का इम्यून सिस्टम, जाे उस बीमारी से लड़ने में हमारी मदद करता है। यानी यह शरीर का वह रक्षक है, जाे बाहरी दुश्मनाें काे खत्म करने के लिए चाैबीस घंटे तैयार हाेता है। लेकिन काेविड के मामले में हमारा यह “साथी’ खुद कंफ्यूज हाे रहा है अाैर यही माैत की सबसे बड़ी वजह बन रही है।
इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने के साथ-साथ अपने शरीर काे ही नुकसान पहुंचाने लगता है। इसी स्थिति काे साइटाेकाइन स्टाॅर्म कहते हैं, जाे इन दिनाें खूब चर्चा में है। कमाेबेश ज्यादातर काेविड राेगियाें में माैत की वजह भी यही सामने अा रहा है। जैसे ही काेई वायरस शरीर में प्रवेश करता है ताे शरीर में माैजूद साइटाेकाइन प्राेटीन उससे लड़ने लगता है।
लेकिन काेविड के कई मामलाें में साइटाेकाइन तूफान जैसी स्थिति पैदा हाे रही है, जिसमें साइटकाेइन वायरस के साथ-साथ अपने शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी मारने लगता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि साइटोकाइन एक प्रतिरोधक प्रोटीन है, जो हमारे शरीर से संक्रमण और कैंसर को भगाने में मदद करता है, लेकिन जब यह अनियंत्रित हो जाता है तब ये आपको बेहद गंभीर रूप से बीमार कर सकता है या फिर जान भी ले सकता है और काेविड के कई मामलाें में ऐसा ही हाे रहा है।
इसीलिए बहुत सारे मरीजों में यह देखा जा रहा है कि रात तक राेगी अच्छे भले बात कर रहे थे और कुछ घंटों बाद सांसें टूट गई। क्या है यह साइटोकाइन स्टॉर्म और क्यों जानलेवा साबित हो रही है यह स्थिति, इसे समझने के लिए भास्कर ने एक्सपर्ट्स की मदद ली। साथ ही यह भी जाना कि इस स्थिति की अर्ली स्टेज पर पहचान कैसे की जा सकती है।
बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी है साइटाेकाइन प्राेटीन, खून में इसकी अधिक मात्रा घातक हो सकती है
तय मात्रा खून में मौजूद साइटोकाइन हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम के लिए बेहद जरूरी व किसी भी बीमारी से लड़ने में कारगर होते हैं। लेकिन यदि खून में इनकी मात्रा अधिक हो जाए तो ये घातक साबित हो सकते हैं। इनकी तय मौजूदगी हमारे इम्यून सिस्टम को बेहतर काम करने में सहायक होती है। इनके बढ़ने से शरीर में इंफेक्शन हो सकता है और दूसरी बीमारियां शरीर को घेर सकती हैं। कई बार इसकी वजह से शरीर के कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं, जो जानलेवा साबित होता है।
कोविड रोगियों में इसके क्या मायने हैं?
कोरोना संक्रमण होने पर रोग के तीसरे से पांचवें दिन में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता द्वारा कुछ रासायनिक परिवर्तन होते हैं, इसी परिवर्तन के कारण शरीर में साइटोकाइन का स्तर बढ़ता है, जो वायरस को मारने के काम आता है। कई बार संवेदनशील लोगों में इनका स्तर जरूरत से ज्यादा हो जाता है और शरीर पर ही दुष्प्रभाव कर देता है। जिससे कोरोना बीमारी की जटिलता या मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है। लगभग सभी कोरोना रोगियाें में मृत्यु का कारण साइटोकाइन स्टाॅर्म होता है।
संक्रमण के 8वें दिन खतरा ज्यादा
साइटाेकाइन स्टाॅर्म होने की संभावना सबसे ज्यादा 8 से 12वें दिन होती है। कई बार यह बीमारी ठीक होने के 2 महीने बाद भी देखने को मिला है। ज्यादातर मामलाें में बीमारी ठीक होने के बाद भी 15 से 20 दिन बाद बुखार आता है। किसी में शरीर टूटने लगता है। श्वास में तकलीफ बढ़ जाती और अचानक अाॅक्सीजन की कमी हो जाती है। यह ज्यादातर 60 साल से ऊपर के रोगी में या जिन्हें मधुमेह, ब्लड प्रेशर, दिल या गुर्दे की बीमारी साथ में हो, उनमें देखने को मिला है।
ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहेंं
शुरुआती बीमारी में 3 से 5वें दिन में कुछ खून की जांचें कराई जाती हैं, जिससे इनका जल्द से जल्द पता लगाने के संभावना बढ़ जाती है, लेकिन कई बार यह भी देखा गया है कि सब जांच सही होने के बाद भी साइटाेकाइन स्टाॅर्म की तकलीफ हो सकती है। सबसे बेहतर है कि यदि काेविड संक्रमण हुअा है या रिकवर हाे चुके हैं ताे भी रोजाना पल्स अाॅक्सीमीटर से अपने अाॅक्सीजन के स्तर को 6 मिनट चलने के बाद नाप लें अगर यह 95 से नीचे जाने लगे तो डाॅक्टर को दिखाएं।
3 केस से समझिए, कितनी गंभीर हो सकती है ये स्थिति
शहर के एक चेस्ट फिजिशियन के पास एक रोगी काेविड से रिकवर हाेने के 2 माह बाद आया और पता चला उनका ऑक्सीजन स्तर फिर से कम हाे रहा है। ऐसा इसलिए हुआ, क्याेंकि वे साइटाेकाइन स्टाॅर्म के शिकार हाे गए। अब दाेबारा उन्हें एडमिट किया गया है और ऑक्सीजन पर हैं।
एक रोगी काेविड से ठीक होकर के 7 दिन बाद अचानक से ऑक्सीजन की कमी के साथ डाॅक्टर तक पहुंचा, उसकी जांचों में साइटाेकाइन स्टाॅर्म की संभावना थी, लेकिन जांचाें से पहले ही राेगी की माैत हाे गई। उसे दाेबारा बुखार भी आया था। ऐसा कई राेगियाें में हाे रहा है।
एक रोगी काे काेविड का इलाज कराकर डिस्चार्ज होने के 7वें दिन अचानक दस्त लगे, जांचों में सभी पैरामीटर साइटाेकाइन स्टाॅर्म की अाेर इशारा कर रहे थे, जब सीटी स्कैन कराया ताे पहले से निमाेनिया बढ़ा हुआ था। राेगी काे दाेबारा पूरा इलाज लेना पड़ रहा है।
रिसर्च : 54 साल से अधिक उम्र वाले मरीजों को खतरा ज्यादा
अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) के मुताबिक अमेरिका में जितने भी लोग कोरोना वायरस से मारे गए हैं, उनमें से सबसे ज्यादा बुजुर्ग हैं। 85 साल के ऊपर के लोग जो कोरोना वायरस से मारे गए हैं, उनमें 27 फीसदी तक लोगों की मौत का कारण साइटोकाइन स्टॉर्म सिंड्रोम था। यहां हुई रिसर्च में 65 से 84 साल तक की उम्र के मारे गए लोगों में 3 से 11 फीसदी साइटोकाइन स्टॉर्म सिंड्रोम देखने को मिला। जबकि, 55 से 64 साल के बीच के लोगों में 1 से 3 प्रतिशत ही इससे मारे गए। 20 से 54 साल की उम्र के लोगों में साइटोकाइन स्टॉर्म 1 फीसदी से कम आया। इसे लेकर एक स्टडी द लैंसेट जर्नल में भी पब्लिश हुई है, जिसमें भी कुछ ऐसे ही तथ्य सामने आए हैं।
अब एक मोहल्ले में 5 पॉजिटिव केस आने पर 100 मीटर के दायरे में होगी जीरो मोबिलिटी
राज्य सरकार द्वारा मंगलवार को नई कोरोना गाइड लाइन लागू की गई। इसी के तहत कोटा में भी एक गली-मोहल्ले में 5 पॉजिटिव केस आने पर जीरो मोबिलिटी घोषित की जाएगी। सीएमएचओ डॉ. बीएस तंवर ने बताया कि मंगलवार से 5 से अधिक पॉजिटिव केस आने पर, उस गली-मोहल्ले में 100 मीटर के दायरे में जीरो मोबिलिटी घोषित की जाएगी।
जीरो मोबिलिटी क्षेत्र में दुकानें बंद रखी जाएंगी। ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। गली मोहल्ले में 5 पॉजिटिव से कम केस आने पर सम्बंधित मकान में रहने वालों को पाबंद किया जाएगा। डॉ. तंवर ने बताया कि जहां ज्यादा केस आते हैं, वहां जीरो मोबिलिटी लागू की जाती है। पूर्व में शहर में 7 कंटेनमेंट जोन बनाए थे। उन इलाकों में अब केस कम आ रहे हैं। इसलिए अब जरूरत नहीं है। वैसे भी दो दिन से कोरोना पॉजिटिव केस कम होते जा रहे हैं।
सुल्तानपुर क्षेत्र से आए 12 केस, एक ही परिवार से मिले 7 राेगी
काेटा में मंगलवार काे भी 169 नए काेराेना मरीज आए, जबकि पहले से भर्ती 5 मरीजाें की माैत हाे गई। नए अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, बजरंग नगर निवासी 65 साल के पुरुष, नयागांव निवासी 65 साल के पुरुष, नगर निगम के पीछे काेटा निवासी 72 साल की महिला, सकतपुरा निवासी 67 साल के पुरुष, नांता निवासी 54 साल के पुरुष की माैत हुई है।
वहीं, आज की रिपाेर्ट में महावीर नगर एक्सटेंशन निवासी एक बैंक मैनेजर, सीएडी में कार्यरत सहायक कर्मचारी, मेडिकल काॅलेज के दाे रेजीडेंट डाॅक्टर भी पाॅजिटिव मिले हैं। इसके अलावा अब ग्रामीण क्षेत्राें में भी मरीज बढ़ने लगे हैं। आज की रिपाेर्ट में सुल्तानपुर ब्लाॅक से 12 नए मरीज रिपाेर्ट हुए हैं, इनमें से 7 एक ही परिवार से हैं।
बीसीएमओ डाॅ. गिर्राज मीणा ने बताया कि दीगाेद कस्बे के एक परिवार में पूर्व में बेटी पाॅजिटिव आई थी, उसके बाद पूरे परिवार के सैंपल कराए गए थे। इनमें से सात लाेग संक्रमित मिले हैं। इनके अलावा सुरेला, नाेताड़ा और सुल्तानपुर कस्बे से एक-एक संक्रमित मिले हैं। एक आशा सुपरवाइजर भी पाॅजिटिव आई है, जिन्हें काेई लक्षण नहीं है। असल में उन्हें ट्रेनिंग के लिए जयपुर जाना था, ट्रेनिंग में काेविड निगेटिव रिपाेर्ट जरूरी थी, इसलिए सैंपल कराया और पाॅजिटिव मिल गई।
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source
https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/kota/news/the-cytokine-storm-means-that-the-immune-system-starts-harming-the-body-this-is-the-biggest-cause-of-death-from-karenna-127970697.html